जातिबाद और आरक्षण केवल सत्ता को हतियाने का प्रयास हैं

क्या हम कायस्थो सरकार से आरक्षण की मांग करनी चाहिए? हमारे हिसाब से कायस्थ ही क्या किसी भी जाति का आरक्षण की मांग करना बिलकुल गलत है । कभी सर झुका नही सकते सर कटा सकते  हैं की नीति पर चलने वाले आज अपनी बौद्धिक क्षमता को कम आंकने लगे तो ये समाज के विनाश के संकेत तो हो सकते है परंतु विकास के संकेत हरगिज नहीं हो सकते । मनुष्य को अपने स्वाभिमान को झुकाना नही बल्कि सामर्थ्यबान बनाना चाहिए मेरा ये स्वतंत्र विचार है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए परंतु इसे जाति विशेष रूप में मानने की भूल नहीं करनी चाहिए आर्थिक आधार पर भी आरक्षण को योग्यता से समझौता करके देखने की बजाय उसकी योग्यतावान बनाने के लिए होना चाहिए। 
और  यही सोच के साथ प्रधानमंत्री जी की भाषा का पालन करना चाहिए जब हमारे देश का राजा खुद ये कह रहा है सबका साथ सबका बिकास तो  ना  केेवल अखंड हिंदुत्व की कल्पना है 
बल्कि समाज के चारों  महत्वपूर्ण स्तंभो को मजबूती प्रदान करना भी हैं सबका साथ सबका विकास के मंतव्य को समझ कर गंतव्य निर्धारित करना ही बुद्धिमता हैं ये योग्यता से खिलवाड़ हैं कि जिस व्यक्ति के अंक आरक्षण के बावजूद भी 40% ही हो तो क्या उसकी योग्यता इतनी हो सकती है कि उसके पढ़ाई हुए विद्यार्थी वैज्ञानिक बन जाए ।
सबका साथ सबका विकास एक छलावा मात्र है
 मेरा मत है कि आरक्षण समाज को ना केवल मानसिक आधार पर कमजोर बनाता है बल्कि समाज को जातिवाद का पाठ पढ़ने पर मजबूर कराता है तो क्यों न हम इस पापी मानसिकता को जड़ से उखाड़ फेंके । आप सभी लोगो को ये सोचना होगा कि ईश्वर बुद्धि का दान किसी व्यक्ति विशेष को तो दे सकता है परंतु किसी जाति विशेष को नहीं एक तरफ हम सभी मिलकर जातिवाद का घोर विरोध करते हैं फिर भी राजनीति जातिवाद को बढ़ावा देती है और हम चुपचाप सुनते हैं यह कैसा लोकतंत्र है जो जनता को जनता से लड़वा कर अपना उल्लू सीधा करते हैं और उसी जनता पर राज करते हैं हर तरफ राजनीति में जातिवाद का बोल वाला है कोई ब्राह्मण पक्ष को तो कोई दलित पक्ष को तो कोई मुस्लिम पक्ष को अपना अपना बना रहा है परंतु सत्ता में आते ही किसी भी पक्ष को कुछ भी नहीं मिलता मिलता है तो वोट बैंक की राजनीति में एक दूसरे से बंटवारा एक दूसरे से लड़ाई एक दूसरे से घोर विरोध आप में से मुझे कोई बता सकता है कि क्या भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री आरक्षण प्राप्त कर कर ही प्रधानमंत्री बने थे ? क्या भारत को स्वतंत्र कराने वाले सुभाष चंद्र बोस आरक्षण प्राप्त कर कर ही आईएएस अधिकारी बने थे? क्या भारत का संविधान देने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आरक्षण के बिना संविधान को नहीं लिख पाते? इन सब का जवाब मेरे मत से नहीं में ही होगा कवि ने कहा है कि 
        

















अब आप खुद यह विचार करें की आपको अपनी योग्यता पर भरोसा है या आरक्षण की दो धारी तलवार पर आप अपने विचार मुझ तक अवश्य पहुंचाएं इस पर अपनी राय जरूर दें फैसला आपके हाथ है कि आप आरक्षण या आभक्षण मैं अंतर कर पाते हैं या नहीं हो सकता है आपके विचार कुछ और हो परंतु मुझे लगता है कि हमें इस आरक्षण के विरोध में आवाज उठानी चाहिए और हिंदुत्व की भावना को मजबूत करते हुए हिंदुत्व के मजबूत चार स्तंभों को एकता का प्रतीक बनते हुए एक नई दिशा समाज को देनी चाहिए। 
ये लेखक के स्वतंत्र विचार है 
                                        दुष्यंत सक्सेना नोएडा

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