कम्पनी मालिक और सुपरबाइजरो की मिलीभगत से स्रमिको का शोषण

 कम्पनी सुपरवाइजर की चापलूसी छोटे हेल्पर और कामगारों पर  पढ़ रही भारी सुपरवाइजरो ने छोटे श्रमिको को जरूरत से ज्यादा परेशान कर अनाप शनाप कार्य लेकर अपनी अहमियत को बढाकर अपने वेतन को बढाने का कार्य शुरू कर रखा है। इन सुपरवाइजर को छोटे वर्करों का दर्द बिल्कुल नहीं होता कारण केवल यह है कि जितने कम वर्करों से कार्य करा लेंगे तो अपनी वाहवाही लूट लेंगे बस इनका यही कार्य बचा है लेकिन कंपनी मालिकों को यह कतई नहीं देखता की तीन वर्करों का काम अगर एक बार फिर से लिया जाएगा तो कब तक और कैसे कर पाएगा मामला केवल है ही नहीं थमता मालिक केवल काम चाहता है वर्कर जिए या मरे यह कार्य केवल भाजपा सरकार ही हो रहा है। आखिर गरीब तबके के श्रमिकों का कंपनी सुपरवाइजर कब तक खून पियेंगे । कंपनी मालिक और सुपरवाइजर लेबर को ओवरटाइम का लालच देकर उनसे 30000 का काम लेते हैं और 9000 की तनखा दिखाते हैं क्या यह गरीबों का शोषण नहीं है कब जाएगी सरकार और कब जाएंगे यह श्रमिक लेकिन सवाल तो उठता है कि पापी पेट का सवाल है आदमी का मजबूरी में शोषण करना सबसे बड़ा अपराध है लेकिन ना ही कंपनी मालिक इस बात को समझ रहे हैं ना ही सुपरवाइजर।

                                        दुष्यन्त सक्सेना नोएडा



टिप्पणियाँ