नेता और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उड़ाया जाता मजाक

 देश मै जनता के करोड़ों रुपए को चूना लगाकर मौज उड़ा रहे सांसद विधायक एक पत्रकार जो देश का चौथा स्तम्भ माना जाता है लेकिन ना ही उसके लिए टोल टैक्स माफ ना ही मिलता उसको सस्ता भोजन जितनी सेबा इनको दी जाती ना किसी पत्रकार को आखिर देश के नेताओं ने चौथे स्तम्भ का नाम तो दिया लेकिन चौथे स्तंभ का मजाक इन नेताओ से पूछो सच दिखाने पर अंकुश लगाना शुरू कर दिया किसी हॉस्पिटल मै जाओ तो परमीशन चाहिए किसी स्कूल मै जाओ तो बी एस ए का लेटर चाहिए ये केबल अपनी पोल को खुलने को रोकने के लिए नेता और प्रशासनिक तंत्र मनमाने ढंग से धन उगाही करने का काम कर रहे आखिर इन नेताओ को किसकी परमीशन लेनी होती है जो हर जगह घुटाले बाजी धन उगाही करने मै सफल होते है आखिर यही हमारे देश का संविधान है अब चौथे स्तम्भ का मजाक इन कामचोर नेताओ के माध्यम से किया जाता है मगर चौथे स्तम्भ का कोई माई बाप ही नही आखिर मजाक नही तो क्या है टोल पत्रकारों का माफ नही ट्रेन या बस मै इनको छूट नही आखिर सत्ता और सरकारी तंत्र एक मिली भगत से चारो तरफ अपनी मनमानी करने मै लग रहे है आखिर इन नेताओ को जो जनता का पैसा मिलता है नेता उस पैसे का प्रयोग कहा कहा करते है कोई पूछने बाला ही नही है आखिर चौथे स्तंभ ने अगर एक जुटता को ना दर्शाया तो कभी पुलिस पत्रकारों के साथ अबद्र भाषा का प्रयोग करना अब मजाक हुआ अब मीडिया सेल के द्वारा पुलिस केबल प्रशंसा की खबर डालकर ग्रुप मै शेयर करते पत्रकारों को थाने मै जानेके में लिए ओरोक लगा दी जाती ताकि पुलिस अपनी मनमानी करने को स्वतंत्र रहे इस लिए लग रहा पत्रकारों पर अंकुश।

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