देश के नेता ही बन रहे देश के भक्षक आखिर समान काम सामान बेतन देश के प्रमुख पाए दान शिक्षा स्वास्थ बेरोजगारी लेकिन किसी पहलू पर नही चल रहा कार्य आखिर क्यों नही पड़ते नेताओ के बालक आंगनबाड़ी या सरकारी स्कूलों में फिर प्राईबेट स्कूलों में अलग अलग चलाये जा रहे कोर्स स्कूल ड्रेसो के नाम पर दलाली क्यों नही सरकार करती कि सभी स्कूलो में एक ही कोर्स चलेगा इन नेताओ और प्रशासनिक अधिकारियों नें गरीबो के शोषण की दुकान चलाई है ना की गरीबो की गरीबी मिटाने की दुकान केबल गरीबो को मिटाने का नायाब तरीका तलाशा गया सरकारी आदमी आठ या बारह घण्टे कार्य करेगा लेकिन प्राईबेट आदमी के जाने का समय होगा लेकिन आने का समय नही होगा समाज में नेताओ और प्रशासनिक अधिकारियों नें अपनाया नायाब तरीका गरीबो को मिटाने का काम। संसदीय कार्य मंत्रालय ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी की. 1 अप्रैल 2025 से उनको बढ़ी हुई सैलरी मिलने लगेगी. अब तक सांसदों को 1 लाख रुपए महीना वेतन मिलता था. लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1.24 लाख रुपए कर दिया गया है.बात करें सैलरी के ऊपर मिलने वाले भत्तों की तो इसकी लिस्ट बहुत लंबी है। इसमें डायरेक्ट एरियर (सालाना) : 3 लाख 80 हजार रु, हवाई सफर भत्ता (सालाना) : 4 लाख 8 हजार रु, रेल सफर भत्ता (सालाना) : 5 हजार रु, पानी भत्ता (सालाना) : 4 हजार रुपए रु, बिजली भत्ता (सालाना) : 4 लाख रु जैसे कई भत्ते शामिल हैं। एक सांसद को सैलरी के अलावा करीब 1 लाख 51 हजार 833 रुपए प्रतिमाह यानी 18 लाख 22 हजार रुपए सालाना भत्ता दिया जाता है।फिक्स्ड सैलरी और भत्ते को जोड़ें तो एक सांसद एक महीने में 2,91,833 रुपए वेतन पाता है। यानी देश को एक सांसद सालाना 35 लाख रुपए का पड़ता है।भात करें भत्ते में जुड़ी चीजों की तो एक सांसद को 50 हजार यूनिट फ्री बिजली, 1 लाख 70 हजार फ्री कॉल्स, 40 लाख लीटर पानी, रहने के लिए सरकारी बंगला (जिसमें सारे फर्नीचर और एयरकंडीशन, और इनका मेंटेनेंस भी फ्री) शामिल है।दूसरी ओर चंडीगढ़ शहर में सफाई कर्मचारी तीन महीने से बिना वेतन के काम करने को मजबूर हैं। इनमें कई महिलाएं भी हैं, जो अपना परिवार चला रही हैं। आर्थिक तंगी के चलते कई कर्मचारी भूखे पेट रहकर भी शहर की सफाई कर रहे हैं, जबकि उनके बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। आम आदमी पार्टी की पार्षद प्रेमलता ने मेयर हरप्रीत कौर बबला पर सवाल उठाया है।जब देश में महंगाई की मार से आम आदमी की कमर टूट रही हो, सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हों और रेल में बुजुर्गों व दिव्यांगों की रियायतें बंद कर दी गई हों, ऐसे में हमारे ‘माननीयों’ की किस्मत लगातार चमक रही है। संसद में बैठे ‘जनप्रतिनिधि’ भले ही जनता की तकलीफों पर कितनी ही लंबी-लंबी तकरीरें झाड़ें, लेकिन जब बात अपनी सैलरी और भत्तों की आती है तो उनकी एकजुटता देखते ही बनती है। ताजा उदाहरण 2025 में सांसदों की सैलरी में 24 फीसद इजाफे का है। अब सांसदों को 1.24 लाख रुपये प्रति माह मिलेंगे, जो पहले 1 लाख रुपये थे। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (मुद्रास्फीति सूचकांक) के आधार पर यह बढ़ोतरी हुई है। मतलब यह कि महंगाई भले ही आम जनता की जेब ढीली कर दे, लेकिन हमारे ‘माननीयों’ की जेबें महंगाई से बची रहेंगी। पूर्व सांसदों की पेंशन भी बढ़कर 31,000 रुपये हो गई है, जो पहले 25,000 रुपये थी। पांच साल से ज्यादा सांसद रहे तो हर साल के लिए अतिरिक्त 2,500 रुपये की पेंशन मिलेगी। यानी एक बार सांसद बन जाएं, तो जिंदगी भर आराम और सरकारी खजाने से फायदा उठाइए।लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। शायद ही कोई ऐसी वस्तु हो, जो महंगाई के दायरे से बाहर नजर आ रही हो। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के दाम पिछले कई महीनों से बढ़ ही रहे हैं। खाने-पीने के सामान से लेकर फल-सब्जियां और दूध तक महंगा हो गया है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यवर्ग से लेकर गरीब तबके तक पर साफ नजर आ रहा है। हालात जिस तरह के बने हुए हैं उससे तो लगता नहीं कि हाल-फिलहाल महंगाई से कोई राहत मिल पाएगी। जहां तक सवाल है पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने का, तो इस मामले में सरकार पहले ही कह चुकी है कि यह विदेशी बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ने का नतीजा है। ऐसे में उसके हाथ में कुछ नहीं है। जाहिर है, महंगाई अपनी रफ्तार से बढ़ेगी और आम आदमी को ही इसका बोझ ढोना होगा। वैसे महंगाई बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए कोई खराब संकेत नहीं होता। महंगाई बढ़ने का एक मतलब यह भी है कि बाजार में मांग बढ़ रही है, इसलिए चीजें मंहगी हो रही हैं। लेकिन यह तब तक ही अच्छा है जब खर्च करने के लिए लोगों के हाथ में पैसा हो और अर्थव्यवस्था मजबूत हो। पर अभी हालात ऐसे तो हैं नहीं। लोग महामारी से पैदा हालात खासतौर से आर्थिक संकट से उबरे भी नहीं हैं। पिछले डेढ़ साल में उद्योगों और बाजार पर महामारी का काफी बुरा असर पड़ा है। करोड़ों लोगों का कामधंधा चौपट हो गया। आमदनी में भारी गिरावट आई है।
देश के नेता ही बन रहे देश के भक्षक आखिर समान काम सामान बेतन देश के प्रमुख पाए दान शिक्षा स्वास्थ बेरोजगारी लेकिन किसी पहलू पर नही चल रहा कार्य आखिर क्यों नही पड़ते नेताओ के बालक आंगनबाड़ी या सरकारी स्कूलों में फिर प्राईबेट स्कूलों में अलग अलग चलाये जा रहे कोर्स स्कूल ड्रेसो के नाम पर दलाली क्यों नही सरकार करती कि सभी स्कूलो में एक ही कोर्स चलेगा इन नेताओ और प्रशासनिक अधिकारियों नें गरीबो के शोषण की दुकान चलाई है ना की गरीबो की गरीबी मिटाने की दुकान केबल गरीबो को मिटाने का नायाब तरीका तलाशा गया सरकारी आदमी आठ या बारह घण्टे कार्य करेगा लेकिन प्राईबेट आदमी के जाने का समय होगा लेकिन आने का समय नही होगा समाज में नेताओ और प्रशासनिक अधिकारियों नें अपनाया नायाब तरीका गरीबो को मिटाने का काम। संसदीय कार्य मंत्रालय ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी की. 1 अप्रैल 2025 से उनको बढ़ी हुई सैलरी मिलने लगेगी. अब तक सांसदों को 1 लाख रुपए महीना वेतन मिलता था. लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1.24 लाख रुपए कर दिया गया है.बात करें सैलरी के ऊपर मिलने वाले भत्तों की तो इसकी लिस्ट बहुत लंबी है। इसमें डायरेक्ट एरियर (सालाना) : 3 लाख 80 हजार रु, हवाई सफर भत्ता (सालाना) : 4 लाख 8 हजार रु, रेल सफर भत्ता (सालाना) : 5 हजार रु, पानी भत्ता (सालाना) : 4 हजार रुपए रु, बिजली भत्ता (सालाना) : 4 लाख रु जैसे कई भत्ते शामिल हैं। एक सांसद को सैलरी के अलावा करीब 1 लाख 51 हजार 833 रुपए प्रतिमाह यानी 18 लाख 22 हजार रुपए सालाना भत्ता दिया जाता है।फिक्स्ड सैलरी और भत्ते को जोड़ें तो एक सांसद एक महीने में 2,91,833 रुपए वेतन पाता है। यानी देश को एक सांसद सालाना 35 लाख रुपए का पड़ता है।भात करें भत्ते में जुड़ी चीजों की तो एक सांसद को 50 हजार यूनिट फ्री बिजली, 1 लाख 70 हजार फ्री कॉल्स, 40 लाख लीटर पानी, रहने के लिए सरकारी बंगला (जिसमें सारे फर्नीचर और एयरकंडीशन, और इनका मेंटेनेंस भी फ्री) शामिल है।दूसरी ओर चंडीगढ़ शहर में सफाई कर्मचारी तीन महीने से बिना वेतन के काम करने को मजबूर हैं। इनमें कई महिलाएं भी हैं, जो अपना परिवार चला रही हैं। आर्थिक तंगी के चलते कई कर्मचारी भूखे पेट रहकर भी शहर की सफाई कर रहे हैं, जबकि उनके बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। आम आदमी पार्टी की पार्षद प्रेमलता ने मेयर हरप्रीत कौर बबला पर सवाल उठाया है।जब देश में महंगाई की मार से आम आदमी की कमर टूट रही हो, सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हों और रेल में बुजुर्गों व दिव्यांगों की रियायतें बंद कर दी गई हों, ऐसे में हमारे ‘माननीयों’ की किस्मत लगातार चमक रही है। संसद में बैठे ‘जनप्रतिनिधि’ भले ही जनता की तकलीफों पर कितनी ही लंबी-लंबी तकरीरें झाड़ें, लेकिन जब बात अपनी सैलरी और भत्तों की आती है तो उनकी एकजुटता देखते ही बनती है। ताजा उदाहरण 2025 में सांसदों की सैलरी में 24 फीसद इजाफे का है। अब सांसदों को 1.24 लाख रुपये प्रति माह मिलेंगे, जो पहले 1 लाख रुपये थे। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (मुद्रास्फीति सूचकांक) के आधार पर यह बढ़ोतरी हुई है। मतलब यह कि महंगाई भले ही आम जनता की जेब ढीली कर दे, लेकिन हमारे ‘माननीयों’ की जेबें महंगाई से बची रहेंगी। पूर्व सांसदों की पेंशन भी बढ़कर 31,000 रुपये हो गई है, जो पहले 25,000 रुपये थी। पांच साल से ज्यादा सांसद रहे तो हर साल के लिए अतिरिक्त 2,500 रुपये की पेंशन मिलेगी। यानी एक बार सांसद बन जाएं, तो जिंदगी भर आराम और सरकारी खजाने से फायदा उठाइए।लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। शायद ही कोई ऐसी वस्तु हो, जो महंगाई के दायरे से बाहर नजर आ रही हो। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के दाम पिछले कई महीनों से बढ़ ही रहे हैं। खाने-पीने के सामान से लेकर फल-सब्जियां और दूध तक महंगा हो गया है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यवर्ग से लेकर गरीब तबके तक पर साफ नजर आ रहा है। हालात जिस तरह के बने हुए हैं उससे तो लगता नहीं कि हाल-फिलहाल महंगाई से कोई राहत मिल पाएगी। जहां तक सवाल है पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने का, तो इस मामले में सरकार पहले ही कह चुकी है कि यह विदेशी बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ने का नतीजा है। ऐसे में उसके हाथ में कुछ नहीं है। जाहिर है, महंगाई अपनी रफ्तार से बढ़ेगी और आम आदमी को ही इसका बोझ ढोना होगा। वैसे महंगाई बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए कोई खराब संकेत नहीं होता। महंगाई बढ़ने का एक मतलब यह भी है कि बाजार में मांग बढ़ रही है, इसलिए चीजें मंहगी हो रही हैं। लेकिन यह तब तक ही अच्छा है जब खर्च करने के लिए लोगों के हाथ में पैसा हो और अर्थव्यवस्था मजबूत हो। पर अभी हालात ऐसे तो हैं नहीं। लोग महामारी से पैदा हालात खासतौर से आर्थिक संकट से उबरे भी नहीं हैं। पिछले डेढ़ साल में उद्योगों और बाजार पर महामारी का काफी बुरा असर पड़ा है। करोड़ों लोगों का कामधंधा चौपट हो गया। आमदनी में भारी गिरावट आई है।


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