*मथुरा के ग्राम भरतिया में दबंगों का तांडव, 10 दिन बाद भी पुलिस प्रशासन मौन, जानलेवा हमले को 'नॉर्मल' धाराओं में दबाने का आरोप*
कान्हा की नगरी मथुरा के बलदेव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भरतिया में इन दिनों कानून का राज नहीं, बल्कि दबंगों का खौफ सिर चढ़कर बोल रहा है। यहाँ करीब 10 दिन पूर्व एक व्यक्ति पर हुए बर्बर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। घटना के इतने दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने से अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि वे अब पीड़ित परिवार को सामूहिक रूप से खत्म करने की धमकियां दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार, दबंगों ने पीड़ित को लाठी, डंडों और लोहे के सरियों से उस वक्त तक बेदर्दी से पीटा जब तक वह अधमरा नहीं हो गया। शरीर पर गहरे जख्म और लोहे के सरियों के निशान इस खूनी खेल की गवाही दे रहे हैं, लेकिन बलदेव पुलिस ने इस गंभीर वारदात को महज एक साधारण मारपीट की घटना मानकर 'नॉर्मल' धाराओं में मुकदमा दर्ज कर इतिश्री कर ली है।
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस की इसी ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपी आज खुलेआम गांव की गलियों में सीना तानकर घूम रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि ये दबंग दिन-दहाड़े मोटरसाइकिलों पर सवार होकर उनके घर के बाहर आते हैं और भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए अभद्र टिप्पणियां करते हैं। इतना ही नहीं, पीड़ित के बेटे को लगातार फोन पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पूरा परिवार घर के भीतर कैद होने को मजबूर हो गया है। गांव की स्थिति यह है कि ये अपराधी केवल इसी परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य ग्रामीणों के साथ भी लगातार मारपीट और अभद्र व्यवहार कर रहे हैं, जिससे पूरे ग्राम भरतिया में दहशत और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की चुप्पी ने इन अपराधियों को मानो 'अपराध करने का लाइसेंस' दे दिया है।
पीड़ित परिवार ने अब जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस मामले में जानलेवा हमले की उचित धाराएं जोड़ी जाएं और अपराधियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुलिस ने समय रहते इन गुंडों पर शिकंजा नहीं कसा, तो गांव में कभी भी कोई बड़ी अनहोनी या हिंसक झड़प हो सकती है। फिलहाल, बलदेव पुलिस की इस रहस्यमयी खामोशी और हल्की धाराओं के खेल ने योगी सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर भी स्थानीय स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाते हैं या फिर ये दबंग ऐसे ही कानून की धज्जियां उड़ाते रहेंगे।


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